Monday, March 9, 2009

भोथर चटिया के बस्ता मोट

भोथर चटिया के बस्ता मोट

(भोथर = पढाई में मंदबुद्धि/मन न लगाने वाला, चटिया =विधार्थी, बस्ता = किताब का थैला, मोट = मोटा, भारी )
इसका अर्थ है कि जो विद्यार्थी पढने में मूढ होते हैं वे दिखाने के लिए ढेर सारी किताबें थैले में लेकर चलते हैं.
यह कहावत बिहार के अधिकाँश जिलों में बहुत प्रचलित है. पढाई में पिछडे लड़कों को उलाहना देने में इसका उपयोग किया जाता है.

4 विचार आए:

राज भाटिय़ा said...

आपको और आपके परिवार को होली की रंग-बिरंगी ओर बहुत बधाई।
बुरा न मानो होली है। होली है जी होली है

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

सत्‍यार्थी जी पहली ही पोस्‍ट आपने शानदार दी है। इसके लिए आभार। उम्‍मीद है आगे भी आपका ऐसा ही आशीर्वाद मिलता रहेगा। फोटो वाला आइडिया भी ठीक है। मैं आगे कोशिश करूंगा कि अपनी पोस्‍ट में भी फोटो जोडूं। इससे कहावत याद रखना आसान हो जाएगा।

एक बार फिर आभार।

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

सिद्धार्थ जी, प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद

Abhishek said...

Sahi pahchan batai gai hai is kahavat mein.

 

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