Skip to main content

एक कहावत

दूर का ढोल सुहाना लगे है ।
अग्रेजी में इसे ही कहते है " द ग्रास इस ग्रीन अल्वाय्स ओन द अदर साइड " यानि कि कोई भी चीज दूर से बहुत अच्छी लगती है। पर पास जाने पर उसकी खामिया हमें दिखायी पड़ने लगती है।

Comments

seema gupta said…
" यानि कि कोई भी चीज दूर से बहुत अच्छी लगती है। पर पास जाने पर उसकी खामिया हमें दिखायी पड़ने लगती है।
" bilkul sach hai ..."

Regards
प्रणाम
एकदम सत्य वचन . जो नहीं होता वो अच्छा लगता है और जो होता है वो बेकार दिखता है .
साथियों पहली बात यह कि आईएमइंडियन वास्‍तव में माधवीजी हैं दिल्‍ली से। जो पूरे जोश खरोश से इस ब्‍लॉग पर लिख रही हैं और इसे इतना सुंदर बनाने में सहयोग कर रही हैं।

अब माधवीजी से, सुंदर कहावत। आभार।
यह कहावत बहुत सही बात ब्यान करती है ..
Udan Tashtari said…
सही कहावत!
imnindian said…
par siddharth ji ,asli dhanyawad apko, kyo ki site apne pehle banayee thi , vichar aap ke man me pehle aaya. hum to bas karwa se judte gaye.
Madhavi
बिलकुल सही.
धन्यवाद

Popular posts from this blog

चैत चना, वैशाख बेल - एक भोजपुरी कहावत

चइते चना, बइसाखे बेल, जेठे सयन असाढ़े खेल  सावन हर्रे, भादो तीत, कुवार मास गुड़ खाओ नीत  कातिक मुरई, अगहन तेल, पूस कर दूध से मेल  माघ मास घिव खिंच्चड़ खा, फागुन में उठि प्रात नहा ये बारे के सेवन करे, रोग दोस सब तन से डरे।
यह संभवतया भोजपुरी कहावत है। इसका अर्थ अभी पूरा मालूम नहीं है। फिर भी आंचलिक स्‍वर होने के कारण गिरिजेश भोजपुरिया की फेसबुक वॉल से उठाकर यहां लाया हूं।

नंगा और नहाना

एक कहावत : नंगा नहायेगा क्या और निचोडेगा क्या ?
यानि जो व्यक्ति नंगा हो वो अगर नहाने बैठेगा तो क्या कपड़ा उतारेगा और क्या कपड़ा धोएगा और क्या कपड़ा निचोडेगा। मतलब " मरे हुए आदमी को मार कर कुछ नही मिलता" ।
होली की शुभ कामनाये सभी को।
माधवी

एक कहावत

न नौ मन तेल होगा , न राधा नाचेगी ।
ये कहावत की बात पुरी तरह से याद नही आ रही है, पर हल्का- हल्का धुंधला सा याद है कि ऐसी कोई शर्त राधा के नाचने के लिए रख्खी गई थी जिसे राधा पुरी नही कर सकती थी नौ मन तेल जोगड़ने के संदर्भ में । राधा की माली हालत शायद ठीक नही थी, ऐसा कुछ था। मूल बात यह थी कि राधा के सामने ऐसी शर्त रख्खइ गई थी जो उसके सामर्थ्य से बाहर की बात थी जिसे वो पूरा नही करपाती। न वो शर्त पूरा कर पाती ,न वो नाच पाती।
अजगर करे ना चाकरी पंछी करे ना काम ,
दास मलूका कह गए सब के दाता राम ..
तात्पर्य -  अजगर किसी की नौकरी नहीं करता और पक्षी भी कोई काम नहीं करते भगवान सबका पालन हार है इसलिए कोई काम मात करो भगवान स्वयं ही देगा आलसी लोगों के लिए मलूक दास जी की ये पंक्तियाँ रामबाण है !

खंगार की जाति

"भोंर मछों और खंगार की जात सोतन  बधियो आधी रात " भावार्थ ;- शहद की बड़ी मधुमक्खी और खंगार जाति के  व्यक्ति बड़े ही खतरनाक होते हैं इसलिए उनका बध आधी रात के समय जब वे सोये हुए हो तब करना चाहिए ! इस कहावत में खंगार वीरों से शत्रुओं में ब्याप्त भय का बोध होता है ........