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Showing posts from February, 2010
ऊधौ का देना ना माधौ का लेना !
तात्पर्य - किसी का कर्ज ना होना !
सम्बन्ध- नौ नगद ना तेरह  उधार !
पाल पाल तोरे जी खां काल !
तात्पर्य - सांप कभी भी आश्रय दाता को मार सकता है इसलिए उसे नहीं पालना चाहिए !
काग घोंसला मारिये , मसि भींजत परिहार !
जाट जरुरी मारिये , घुट्नन चलत खंगार ! !
तात्पर्य - काग (कौआ) परिहार, जाट और खंगार ये चार चतुर चालक शत्रु होते हैं अगर इनसे बैर है तो कौए को घोसले में ही , परिहार को मूंछ निकलने से पहले , जाट को जब भी मौका मिले और खंगार को जब वह बच्चा हो तब ही मार देना चाहिए  बर्ना देर हो जाएगी !
कहे कबीर जमाना छानियाँ ,
भक्त ना देखे सुनार बानियाँ !
तात्पर्य - सुनार बानियाँ लोग कभी भक्त नहीं होते !