Saturday, February 13, 2010

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ऊधौ का देना ना माधौ का लेना !
तात्पर्य - किसी का कर्ज ना होना !
सम्बन्ध- नौ नगद ना तेरह  उधार !
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पाल पाल तोरे जी खां काल !
तात्पर्य - सांप कभी भी आश्रय दाता को मार सकता है इसलिए उसे नहीं पालना चाहिए ! 
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काग घोंसला मारिये , मसि भींजत परिहार !
जाट जरुरी मारिये , घुट्नन चलत खंगार ! !
तात्पर्य - काग (कौआ) परिहार, जाट और खंगार ये चार चतुर चालक शत्रु होते हैं अगर इनसे बैर है तो कौए को घोसले में ही , परिहार को मूंछ निकलने से पहले , जाट को जब भी मौका मिले और खंगार को जब वह बच्चा हो तब ही मार देना चाहिए  बर्ना देर हो जाएगी !  
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कहे कबीर जमाना छानियाँ ,
भक्त ना देखे सुनार बानियाँ !
तात्पर्य - सुनार बानियाँ लोग कभी भक्त नहीं होते !
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लेना एक ना देना दो .
अर्थ - किसी प्रयोजन का ना होना
 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

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