Tuesday, September 29, 2009

एक कहावत पुरानी

4विचार आए
पूत कपूत तो का धन संचय , पूत सपूत तो का धन संचय
इस कहावत के पीछे का मर्म यह है कि पूत अगर कपूत निकला तो उसके लिए धन संचय करके क्या फायदा , क्यों कि कपूत तो कमाया हुआ धन नष्ट कर देगा. और अगर वो सपूत निकला तो भी धन संचय कर के क्या फायदा , क्योकि सपूत खुद धन संचय कर सकता है. दोनों ही हालातो में मनुष्य को संग्रह कि नीति से बचना का सुझाव दिया गया है.

Saturday, September 26, 2009

एक कहावत

1 विचार आए
बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद

यानि गलत पात्र से (बन्दर से ) किसी सही चीज (अदरक ) का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए .
जैसे किसी डाक्टर से किसी कानून की बरीकियो के बारे में राय लेना .

एक कहावत

2विचार आए
दान के बछ्छिया के दांत नहीं गिने जाते

यानि जो चीज मुफ्त में मिल रही है उसमे मीन मेख नहीं निकला जाता है. जैसा मिलरहा है वैसा स्वीकार किया जाता है.

Thursday, September 24, 2009

कौआ कोसे ढोर न मरे

3विचार आए

कौआ के कोसे ढोर मरे तो,
रोज कोसे, रोज मारे, रोज खाए।

----------------------------------

कोस - किसी के बारे में बुरा सोचना, किसी का बुरा होने की कामना करना।
ढोर - जानवर

-----------------------------
भावार्थ - इसका सीधा सा अर्थ है कि यदि बुरा सोचने वालों के कारण ही किसी का बुरा होने लगे तो सभी बैठे-बैठे लोगों का बुरा करते रहेंगे। यदि ऐसा होता तो कौआ को अपने खाने के लिए किसी मरे जानवर का इंतज़ार नहीं करना पढता। वह रोज किसी जानवर का बुरा सोचता (मरने की सोचता) जानवर मरते और कौआ को खाने को मिलता।
इससे शिक्षा मिलती है कि हमारा बुरा हमेशा हमारे कर्मों से होता है, किसी के बुरा चाहने से हमारा बुरा नहीं होता।

Monday, September 7, 2009

5विचार आए
हड़बड़ी बियाह , कनपटी सिनूर
यह मैथिलि कहावत मेरे एक मित्र रजनीश झा ने मेरे ब्लॉग बकबक पर प्रतिक्रिया स्वरुप डाला था मै आप के सामने पेश कर रही हूँ .

हड़बड़ी का काम शैतान का होता है. जल्दीबाजी में शादी करने गए थे तो दुल्हे ने दुल्हन के कान में सिन्दूर डाल दिया .

Sunday, September 6, 2009

गाडी देख पग भारी

5विचार आए
"गाडी देख,पग भारी"

कोई भी सुविधा (जो पहले नहीं थी,तब भी काम चल रहा था) जब उपलब्ध होने की सम्भावना होती है तो ऎसा महसूस होने लगता है कि उसके बिना हमारा काम चल ही नहीं सकता। जैसे पैदल चलने वाले को गाडी में बैठने का अवसर मिलते ही उसे अपने पैर पैदल चलने में भारी भारी से महसूस होने लगते हैं।

Tuesday, September 1, 2009

एक कहावत

3विचार आए
सारा खीर खा के पेंदा तीता करना

इस कहावत का मतलब होता है कि सारा काम निपटा कर अंत में ऐसा कुछ कर देना या कह देना जिससे पहले किया गए काम का सारा मजा किरकिरा हो जाये .
तीता- कड़वा , पेंदा - किसी भी चीज का अंतिम सिरा
 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

Blogger Templates by Splashy Templates