Saturday, September 26, 2009

एक कहावत

दान के बछ्छिया के दांत नहीं गिने जाते

यानि जो चीज मुफ्त में मिल रही है उसमे मीन मेख नहीं निकला जाता है. जैसा मिलरहा है वैसा स्वीकार किया जाता है.

2 विचार आए:

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

अच्‍छी कहावत है। पर मैंने इसे शायद किसी और तरीके से सुन रखी है।

imnindian said...

तो कृपाय वैसे भी लिख दे , मेरे साथ- साथ बंधुओ का भी ज्ञान वर्धन हो जाये गा.

 

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