Tuesday, March 3, 2009

एक कहावत

न नौ मन तेल होगा , न राधा नाचेगी ।
ये कहावत की बात पुरी तरह से याद नही आ रही है, पर हल्का- हल्का धुंधला सा याद है कि ऐसी कोई शर्त राधा के नाचने के लिए रख्खी गई थी जिसे राधा पुरी नही कर सकती थी नौ मन तेल जोगड़ने के संदर्भ में । राधा की माली हालत शायद ठीक नही थी, ऐसा कुछ था। मूल बात यह थी कि राधा के सामने ऐसी शर्त रख्खइ गई थी जो उसके सामर्थ्य से बाहर की बात थी जिसे वो पूरा नही करपाती। न वो शर्त पूरा कर पाती ,न वो नाच पाती।

13 विचार आए:

आलोक सिंह said...

जोहार
न नौ मन तेल होगा , न राधा नाचेगी ।
राधा ने शर्त रक्खी थी की जब नौ मन तेल के दिए जलेगे , तभी वो नाचेगी . उस साल गाँव में सुखा पड़ा था इसलिए नौ मन तेल होना नामुमकिन था .
जब किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक सामग्री का उपलब्ध होना कठिन होता है तो इस कहावत का प्रयोग करते हैं .

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

आलोक ठीक कह रहे हैं.

Udan Tashtari said...

आलोक जी की बात सही प्रतीत होती है.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

जी हाँ सही बात बतायी आलोक जी ने ..सही बनी है यह कहावत भी

Gagagn Sharma, Kuchh Alag sa said...

उन दिनों बिजली तो होती नहीं थी सो ज्यादातर मेले-ठेले, मनोरंजन इत्यादि दिन में ही होते होंगें। उन दिनों पैसे का चलन भी कम था तो चीजों के विनिमय से ही काम चलता होगा तो राधा ने अपना नाच दिखाने के एवज में नौ मन तेल की मांग रखी होगी (अब यह पता नहीं भागवान इतना तेल क्या करती। कहीं यही तेल चालिस चोरों वाला सरदार तो नहीं ले गया था) जिसके पूरा न होने पर गांववाले बेचारे नृत्यसुख से वंचित रह गये होंगें।

वैसे इस कहावत का प्रयोग, किसी काम के लिए कोई कठिन शर्त ना पूरी होने के उपलक्ष्य में किया जाता है, जैसा कि आलोक जी ने भी कहा है।

राज भाटिय़ा said...

चलिये मै राधा से पुछ कर सारी बात बताता हुं, लेकिन यह राधा रहती कहा है ???
इस कहावत का उपयोग ऎसे कामो के लिये ्किया जाता है जो असम्म्भंब हो, जिस के पुरण होने मओ सभी को शक हो
धन्यवाद

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

और अगर नौ मन तेल इकठ्ठा हो जाए तो... :)

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

to radha nach legi.
NACH dekhne ka majaa bahut hai, kisii GRAMIIN se poochhiye....
HA>>HA>>>>HA

अनिल कान्त : said...

एक तो माली हालत ख़राब और उस पर नौ मन तेल की गुजारिश ... :)



मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

imnindian said...

alok ji ki baat muje bhi thik lagti hai...par yah bhi ho sakta hai radha apne kadar dano ko parakhna chahti thi aur wo khud ko over estimate kar rahi ho..par logo ko pata ho shayad radha ki market value itni nahi hai aur na nau man tel hoga na radha nachegi...
asal me yeh baat kisi kaam ke pura na hone k sandarbh kathin sharat se jodi jati hai...
mul baat hai sab ko kahawat pasand ayi aur mujeh yehi baat achchi lagi.....

Anonymous said...

नामुमकिन शर्त वाली बात तो सही है पर इसमें बात यह थी की मन जो है तरल पदार्थो के वजन के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता था। तो जब यह शर्त रखी गयी तो आखिर तक 9 मन तेल कितना होता है इसका फैसला ना हो सका और राधा का नाचना नहीं हुआ। और इस प्रकार इस कहावत का चलन हुआ।

Vinod Bhardwaj said...

Alok ji ne, aur kisi ne bhi, pooree kahani naheen batayee ki Radha ko nachne ke liye kisne kaha, aur usne shart kyon rakhhee. Yadi kisee ko gyaat ho, to kripaya batayen.Dhanyavaad.

Unknown said...

सब गलत है। इस का मतलब यह है कि न शर्त पूरी होगी न काम होगा।

 

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