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ख़ुद करे तो खेती

खुद करै तो खेती,
नईं तौ बंजर हैती।

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भावार्थ -

इसका अर्थ यह है कि हमें अपने काम स्वयं करने चाहिए। किसी के भरोसे पर काम छोड़ने से उसमें हानि ही होती है। इसी कारण से इस कहावत में खेती का उदाहरण दिया गया है।

Comments

सचमुच कितनी अच्‍छी अच्‍छी कहावते बनायी थी हमारे पूर्वजों ने ...इसका संग्रह करके आप एक नेक काम कर रहे हैं।
sach kahtey hain.
kahavaten kitna kuchh sikhati hain.
हमारे पूर्वजों ने हमे इन कहावतो के जरिये बहुत कुछ समझाया, आप की यह कहावत बिलकुल सही है.
धन्यवाद

आपको और आपके परिवार को होली की रंग-बिरंगी भीनी भीनी सी बधाई।
बुरा न मानो होली है। होली है जी होली है
इन दिनों माधवीजी के साथ कुमारेन्‍द्र जी भी सक्रिय हो गए हैं। रोज नई पुरानी कहावतों से रूबरू करा रहे हैं।
इसके लिए आभार।
imnindian said…
PHOTOWALI KAHAWATO KE SATH BLOG CHAMAK JA RAHA HAI.
AAP SABKO HOLI KI SHUBHKAMNAYE....

MADHAVI SHREE

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चैत चना, वैशाख बेल - एक भोजपुरी कहावत

चइते चना, बइसाखे बेल, जेठे सयन असाढ़े खेल  सावन हर्रे, भादो तीत, कुवार मास गुड़ खाओ नीत  कातिक मुरई, अगहन तेल, पूस कर दूध से मेल  माघ मास घिव खिंच्चड़ खा, फागुन में उठि प्रात नहा ये बारे के सेवन करे, रोग दोस सब तन से डरे।
यह संभवतया भोजपुरी कहावत है। इसका अर्थ अभी पूरा मालूम नहीं है। फिर भी आंचलिक स्‍वर होने के कारण गिरिजेश भोजपुरिया की फेसबुक वॉल से उठाकर यहां लाया हूं।

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तात्पर्य -  अजगर किसी की नौकरी नहीं करता और पक्षी भी कोई काम नहीं करते भगवान सबका पालन हार है इसलिए कोई काम मात करो भगवान स्वयं ही देगा आलसी लोगों के लिए मलूक दास जी की ये पंक्तियाँ रामबाण है !

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