Saturday, March 7, 2009

ख़ुद करे तो खेती

खुद करै तो खेती,
नईं तौ बंजर हैती।

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भावार्थ -

इसका अर्थ यह है कि हमें अपने काम स्वयं करने चाहिए। किसी के भरोसे पर काम छोड़ने से उसमें हानि ही होती है। इसी कारण से इस कहावत में खेती का उदाहरण दिया गया है।

5 विचार आए:

संगीता पुरी said...

सचमुच कितनी अच्‍छी अच्‍छी कहावते बनायी थी हमारे पूर्वजों ने ...इसका संग्रह करके आप एक नेक काम कर रहे हैं।

अल्पना वर्मा said...

sach kahtey hain.
kahavaten kitna kuchh sikhati hain.

राज भाटिय़ा said...

हमारे पूर्वजों ने हमे इन कहावतो के जरिये बहुत कुछ समझाया, आप की यह कहावत बिलकुल सही है.
धन्यवाद

आपको और आपके परिवार को होली की रंग-बिरंगी भीनी भीनी सी बधाई।
बुरा न मानो होली है। होली है जी होली है

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

इन दिनों माधवीजी के साथ कुमारेन्‍द्र जी भी सक्रिय हो गए हैं। रोज नई पुरानी कहावतों से रूबरू करा रहे हैं।
इसके लिए आभार।

imnindian said...

PHOTOWALI KAHAWATO KE SATH BLOG CHAMAK JA RAHA HAI.
AAP SABKO HOLI KI SHUBHKAMNAYE....

MADHAVI SHREE

 

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