Monday, March 23, 2009

मूरख जिंदगी गुजारता है रोते हुए

ज्ञानी काढ़े ज्ञान सूं 
मूरख काढ़े रोय 

काढ़े - गुजारता है या निभाता है 

कहावत का शाब्दिक अर्थ यह है कि जिस व्‍यक्ति के पास ज्ञान होता है वह अपनी जिंदगी के कड़वे मीठे अनुभवों का आंकलन ज्ञान के साथ करता है वहीं मूर्ख आदमी परिस्थितियों का रोना रोते हुए ही जिंदगी गुजार देता है। 

कई बार हताश होता हूं तो मेरी मां मुझे यह कहावत सुना देती हैं। मैं मूरख बनने की बजाय ज्ञानी बनने की चेष्‍टा करने लगता हूं। :) 

2 विचार आए:

आलोक सिंह said...

बहुत ज्ञान देने वाली कहावत बताई .
धन्यवाद

Abhishek Mishra said...

Vakai prerak Kahawat.

 

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