Wednesday, October 13, 2010

चन्द पंजाबी कहावतें

4विचार आए
1. जून फिट्ट् के बाँदर ते मनुख फिट्ट के जाँजी

(आदमी अपनी जून खोकर बन्दर का जन्म लेता है, मनुष्य बिगड कर बाराती बन जाता है. बारातियों को तीन दिन जो मस्ती चढती है, इस कहावत में उस पर बडी चुटीली मार है.)

2. सुत्ते पुत्तर दा मुँह चुम्मिया
न माँ दे सिर हसा
न प्यौ से सिर हसान


(सोते बच्चे के चूमने या प्यार-पुचकार प्रकट करने से न माँ पर अहसान न बाप पर)

3. घर पतली बाहर संगनी ते मेलो मेरा नाम

(घर वालों को पतली छाछ और बाहर वालों को गाढी देकर अपने को बडी मेल-जोल वाली समझती है)

4. उज्जडियां भरजाईयाँ वली जिनां दे जेठ

(जिनके जेठ रखवाले हों, वे भौजाईयाँ (भाभियाँ) उजडी जानिए)
 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

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