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Showing posts from October, 2009

काठ की हंडी बार बार नहीं चढ़ती .

काठ की हंडी बार बार नहीं चढ़ती .
इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को बार - बार मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है सिर्फ एक बार बनाया जा सकता है . जैसे काठ की हांडी चुलेह पर सिर्फ एक बार चढ़ती है बार - बार नहीं वैसे ही किसी को एक बार मूर्ख बनाया जा सकता है. .

सो वो कानईं मे मूत्हे

लला को सिर पै बैठाहो,
सो वो कानईं में मूतहै।

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कानईं - कान में
बैठाहो - बैठाओगे
मूतहै - पेशाब करना
लला - लड़कों को देशज भाषा में बुलाने का शब्द
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भावार्थ - इसे कहावत के स्थान पर लोकोक्ति कहना ज्यादा उचित है। यह बुन्देलखण्ड में बहुत ही ज्यादा प्रचलन में है। इसका अर्थ यह लगाया जाता है कि किसी भी व्यक्ति या बच्चे को अधिक लाड-प्यार दीजिए तो वह बिगड़ैल होकर परेशान करने वालीं हरकतें करने लगता है।

एक कहावत

नौ सो चूहे खा कर बिल्ली हज को चली
यानि सौ गुनाह कर के कोई जब मंदिर जाता है अपना पाप धोने तब यह कहावत याद आती है...