Saturday, March 28, 2009

माई गुन बछरू, पिता गुन घोड़...

माई गुन बछरू, पिता गुन घोड़
नाही ज्यादा त थोड़े-थोड
अर्थात माँ बाप के गुण अपने बच्चो में आते ही हैं यदि बहुत ज्यादा नहीं तो थोड़े ही....

5 विचार आए:

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

सही कहा! यही कहावत हिन्दी में कुछ इस तरह से भी है कि " मां पर धी(बेटी),पिता पर घोडा.. बहुत नहीं तो थोडा-थोडा."

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

बहुत सुंदर डीके शर्माजी ने कहावत को और भी स्‍पष्‍ट कर दिया।


आभार।

संगीता पुरी said...

कहावत तो यहां तक है कि ... जैसी मैया वैसी धीया ... पोछ पाछ नतिनियों को दिया .... मतलब कि मां के बाद उसके बच्‍चों में भी मां के गुण आते हैं।

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

एक कहावत ऐसी भी है "बापे पूत परापत घोडा ना कुछो त थोडम थोडा"

Sudhir (सुधीर) said...

उपरोक्त कहावत के अतिरिक्त माँ एक और कहावत कहा करती थी (जोकि शर्मा जी की कहावत से मिलती जुलती हैं)

जैसन काकर वैसन बिया। जैसन माई वैसन धिया ॥

 

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