Thursday, June 19, 2008

जाट, जमाई भाणजा रेबारी सोनार:::

जाट जमाई भाणजा रेबारी सोनार
कदैई ना होसी आपरा कर देखो उपकार


जाट : यहां प्रयोग तो जाति विशेष के लिए हुआ है लेकिन मैं किसी जाति पर टिप्‍पणी नहीं करना चाह रहा। उम्‍मीद करता हूं कि इसे सहज भाव से लिया जाएगा।

जमाई: दामाद

भाणजा: भानजा

रेबारी सोनार: सुनारों की एक विशेष जाति


इसका अर्थ यूं है कि जाट जमाई भानजे और सुनार के साथ कितना ही उपकार क्‍यों न कर लिया जाए वे कभी अपने नहीं हो सकते। जाट के बारे में कहा जाता है कि वह किए गए उपकार पर पानी फेर देता है, जमाई कभी संतुष्‍ट नहीं होता, भाणजा प्‍यार लूटकर ले जाता है लेकिन कभी मुड़कर मामा को नहीं संभालता और सुनार समय आने पर सोने का काटा काटने से नहीं चूकता।

यह कहावत भी मेरे एक मामा ने ही सुनाई। कई बार

2 विचार आए:

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

इसे निकाल देना ही उचित होगा
किसी भी विघ्नसंतोषी की नज़र
का क्या भरोसा ...?

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

इसे अन्यथा न लें

 

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