Sunday, June 1, 2008

नर्मदांचल,बुन्देली, की लोकोक्तियाँ:-01



  • नर्मदांचल
    हरदा,टिमरनी, क्षेत्र में मुझे जो लोकोक्ति सबसे पसंद आई :"बोर पकी रीछडी का डोला आया"
    बोर:बेर,
    रीछडी: मादा-रीछ,
    डोला:आँखें
    जब बेर पकी तो मादारीछ आंखों मे कन्जक्टिवाईटिस हुआ यानी सही अवसर को खो देना

  • बुन्देली:"मरी जान मल्हारी गावे" मरी-जान: कमजोर शरीर वाला,/वाली, मल्हारी:-राग मल्हार शख्शियत के अनुकूल काम न करना,इसे यह भी कहा जा सकता है सीमोल्घंन करना

5 विचार आए:

Udan Tashtari said...

अच्छा है, जारी रखिये कलेक्शन.

सिद्धार्थ जोशी said...

गिरीशजी
आपने धमाकेदार एंट्री की है। फोटो लगाकर तो आपने आंचलिक स्‍वाद को और भी बढा दिया है। उम्‍मीद करता हूं कि नर्मदा अंचल की ऐसी मीठी बोली का रस लगातार मिलता रहेगा।

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

एंट्री देना ही ज़ोर दार मामला है सो छाप मरा
मत चूके चौहान की तर्ज़ पे
आपका आभारी हूँ

devlal thakur देवलाल ठाकुर said...

आपका ब्लॉग मे वर्णित सामाग्री निःसंदेह अमूल्य है कहावतों का संग्रह बहुत पसंद आया ,आपकी मेरे ब्लाग मे कुछ टिप मेरे लिए मार्गदर्शन का काम कर रही आपका ब्लाग की ले आउट भी बहुत सुंदर है,कृपया इस बरे मे कुछ सलाह देने का कष्ट करेगे

devlal thakur देवलाल ठाकुर said...

बहुत सुन्दर प्रयास है

 

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