Thursday, March 26, 2009

बुड़बक के इयारी आ भादो के उजियारी

बुड़बक के इयारी आ भादो के उजियारी

बुडबक = मूर्ख, बेवकूफ; इयारी = दोस्ती, मित्रता; उजियारी = चांदनी

मतलब यह की भादों महीने की चांदनी और मूर्ख की मित्रता का कोई भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि ये कभी भी साथ छोड़ सकती हैं। भादों के बरसाती मौसम में कम काले बादल चाँद को ढँक लें और अँधेरा छा जाए, कोई ठिकाना नहीं। इसी प्रकार मूर्ख और धूर्त मित्र भी कब साथ छोड़ जाए इसका कोई भरोसा नहीं।

सतीश चंद्र सत्यार्थी

3 विचार आए:

श्यामल सुमन said...

आंचलिता की सुगंध लिए एक अच्छी जानकारी। कहते भी हैं कि-

"राजद्वारे श्मशाने च यः तिष्ठति सः बान्धवः"

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

ऐसी कहावत एक ओर तो मूर्खों के स्‍वभाव से सचेत रहने की सलाह देती है वहीं दूसरी ओर मौसम के संकेतों को समझने में मदद भी करती है।

एक अच्‍छी ज्ञानवर्द्धक कहावत।

महामंत्री - तस्लीम said...

लोक साहित्‍य को सहेजने का यह बहुत सुंदर प्रयास है।
----------
तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

Blogger Templates by Splashy Templates