Tuesday, March 10, 2009

तोरा बैल मोरा भैंसा, हम दूनों के संगत कइसा?

तोरा बैल मोरा भैंसा, हम दूनों के संगत कइसा?

गावों में अभी भी खेत जोतने के लिए बैल या भैंसों का उपयोग किया जाता है। सामान्यतः हल में या तो एक जोड़ी बैल या फ़िर एक जोड़ी भैंसे लगाए जाते हैं। एक बैल और एक भैंसा नही लगाया जाता। कई बार किसानों के पास एक जोड़ी जानवर नहीं होते, एक ही होता है. ऐसे में दो किसान जानवरों की साझेदारी करके काम चलाते हैं. इस कहावत का शाब्दिक अर्थ है कि तुम्हारे पास बैल है और मेरे पास भैंसा इसलिए हम दोनों में मित्रता का तो प्रश्न ही नहीं उठता।

पर इसका वास्तविक अर्थ है कि दो असमान गुणों और प्रकृति वाले व्यक्तियों के बीच कभी मित्रता नहीं हो सकती और अगर हो भी गई तो ज्यादा दिन नहीं टिकती।

5 विचार आए:

Udan Tashtari said...

सही है!! :)

आपको होली की मुकारबाद एवं बहुत शुभकामनाऐं.
सादर
समीर लाल

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

यानि जरूरत में भी समान प्रकृति वाले लोगों के बीच दोस्‍ती होगी। बहुत खूब।

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!

होली की शुभकामनाओं सहित!!!

प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर

राज भाटिय़ा said...

बहुत सही
धन्यवाद

Abhishek said...

Vyavaharik kahavat.

 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

Blogger Templates by Splashy Templates