पाल पाल तोरे जी खां काल !
तात्पर्य - सांप कभी भी आश्रय दाता को मार सकता है इसलिए उसे नहीं पालना चाहिए !
Saturday, February 13, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Labels
बुन्देली कहावतें
(26)
कहावत
(7)
जबलपुर
(4)
भोजपुरी कहावत
(3)
satish chandra satyarthi
(2)
बिहार
(2)
बुन्देली
(2)
भोजपुरी
(2)
राजस्थानी
(2)
सतीश चंद्र सत्यार्थी
(2)
अंचल
(1)
अभिषेक
(1)
इच्छा
(1)
इयारी
(1)
कहावतें
(1)
किसान
(1)
खेती
(1)
गाँव
(1)
घी
(1)
चाँद
(1)
चांदनी
(1)
चिट्ठा चर्चा
(1)
झांकी
(1)
टिमरनी
(1)
तबेला
(1)
तेल
(1)
दमडी की बुलबुल
(1)
दोहा
(1)
नमस्कार
(1)
नर्मदांचल
(1)
नववर्ष
(1)
नाथ
(1)
पंजाबी कहावतें
(1)
बंदर
(1)
बस्ता
(1)
बादल
(1)
बुडबक
(1)
बैजू
(1)
बैल
(1)
ब्लागिंग
(1)
ब्लॉगर
(1)
भैंसा
(1)
भोथर
(1)
मूर्ख
(1)
मेवाडी कहावत
(1)
रतनसिंह शेखावत
(1)
लाडली-लक्ष्मी
(1)
लोक-कहावतें
(1)
लोकसंस्कृ्ति
(1)
विद्यार्थी
(1)
विश्व पर्यावरण दिवस
(1)
शुभकामनायें
(1)
संगति
(1)
सिर
(1)
सुविधा
(1)
स्वर्गीय भारती सराफ
(1)
स्वास्थय
(1)
हँसुआ के बिआह में खुरपी के गीत
(1)
हरदा
(1)
0 विचार आए:
Post a Comment