Saturday, February 13, 2010

काग घोंसला मारिये , मसि भींजत परिहार !
जाट जरुरी मारिये , घुट्नन चलत खंगार ! !
तात्पर्य - काग (कौआ) परिहार, जाट और खंगार ये चार चतुर चालक शत्रु होते हैं अगर इनसे बैर है तो कौए को घोसले में ही , परिहार को मूंछ निकलने से पहले , जाट को जब भी मौका मिले और खंगार को जब वह बच्चा हो तब ही मार देना चाहिए  बर्ना देर हो जाएगी !  

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मेरे अंचल की कहावतें © 2010

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