Tuesday, January 6, 2009

चार दिन के गईले, सुग्गा मोर बन के अइले

चार दिन के गईले, सुग्गा मोर बन के अइले|

भोजपुरी कहावत

कोई व्यक्ति जब चार दिन शहर में रह कर वापस गाँव जाए और चाल ढाल से ख़ुद को शहरी बताये तो उसके लिए यह कहावत कही जाती है| चार दिन शहर में रहकर सुग्गा (तोता) ख़ुद को मोर समझने लगा|

1 विचार आए:

रंजना said...

sahi kaha.Aanchlik kahavaton kee baat hi kuchh aur hai.Uski ras aur mithaas ki kya kahne.

 

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