Saturday, January 3, 2009

एक और bihari कहावत

बात छिले से रुखा होए , लकडी छिले से चिक्कन ।
मतलब बात को जितना बढाये गे उतनी ही कड़वी हो गी , पर लकडी को जितना ही रगड गे वो उतनी ही सुंदर होगी .अर्थात चीजो की अलग -अलग प्रकृति पर निर्भर करता है कि उसके साथ एक जैसा सलूक हो रहा है और उसके परिणाम अलग आ रहे है।

6 विचार आए:

Mired Mirage said...

सही कह रहे हैं।
घुघूती बासूती

आशीष कुमार 'अंशु' said...

SAMAJH NAHEE AAYAA....

सिद्धार्थ जोशी said...

बहुत सुंदर माधवी जी

प्रकृति के अनुसार लोगों से व्‍यवहार करना चाहिए। जैसे हिन्‍दी में कहते हैं गधे और घोड़े को एक ही लाठी से नहीं हांका जा सकता। सपाट और स्‍पष्‍ट। इसी में दूसरा अर्थ यह भी कि विवाद को बढ़ाने की बजाय जहां है वहीं रोक देना उत्‍तम है।
सारगर्भित कहावत

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर!

अशोक पाण्डेय said...

बहुत सुंदर और सारगर्भित भोजपुरी कहावत है।

गौतम राजरिशी said...

पहली बार आपके इस बेमिसाल ब्लौग पर आया हूं और मुग्ध-मोहित हो जा रहा हूं.मैं बिहार के मिथिलांचल से वास्ता रखता हूं और मेरी मां मैथिली कहावतॊं की संदुकी लिये चलती है,जिन्हें आपके इस ब्लौग पर बांटना चाहूंगा...

 

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