Monday, January 5, 2009

एक bihari कहावत

पुतके पाव पलना में ही दिखे है।
अर्थात होन्हर वीरवान के होत चिकने पात ,अगर किसी बच्चे में कुछ अच्छे या बुरे गुण हो तो वो बचपन से ही प्रगत होने लगते है। वो गुण छिपते नही है, जैसे श्री कृष्ण के गुण बचपन से ही प्रगटहोने लगे थे।

2 विचार आए:

राज भाटिय़ा said...

आप के अंचल की कहावते बहुत ही सुंदर है, लेकिन भाई यह सब कहावते पुरे भारत मै वहां की भाषा मै है,
लेकिन मुझे सुने हुये ऎसी कहावते जमाना हो गया, ओर आप के यहां पढ कर बहुत अच्छा लगा.
धन्यवाद

Abhishek said...

कहावतों, परम्पराओं और लोक-गीतों में भी यह समानता साबित करती है कि बोलियाँ अलग-अलग हैं मगर बुनियाद एक ही है.

 

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