Sunday, January 4, 2009

घर का जोगी जोगडा़

घर का जोगी जोगडा़, आन गाँव का सिद्ध

"दूर का ढोल सुहावन" के तर्ज पर यह कहावत गढी गयी है। जोगी (योगी) की अपने घर मे कद्र नहीं होती, लेकिन किसी दुसरे (आन) गाँव में उसे सिद्ध महात्मा बताया जाता है।

7 विचार आए:

आशीष कुमार 'अंशु' said...

क्या बात है? ???

अनुनाद सिंह said...

मुझे ये चित्रावली बहुत पसन्द आयी? ये सब आपने कहाँ से जुगाड़ा है?

Shashwat Shekhar said...

चित्रावली से आपका तात्पर्य कहावतों से है?

रंजना [रंजू भाटिया] said...

हाँ दिन भर बोलते हैं यह ..पर इस पर भी कोई कथा अवश्य रही होगी ..

Amit said...

बहुत सही.

अनुनाद सिंह said...

नहीं जी, मैं तो इन चित्रों की बात कर रहा हूं जो साइड में लगातार बदल रहे हैं। इनमें जो पुराने फोटो हैं बहुत अच्छे लगे।

सिद्धार्थ जोशी said...

अनुनाद जी
नमस्‍कार
पहले तो आपको धन्‍यवाद की आप हमारे ब्‍लॉग पर आए और सराहा।
कोने में जो चित्र लगातार बदल रहे हैं वे गूगल गैजेट से लिए गए हैं। आप तो बहुत पुराने ब्‍लॉगर हैं। एक सामान्‍य जानकारी है। मुझे लगा आप देखते ही पहचान जाएंगे। इस फोटो फ्रेम के नीचे जो लिंक दिया है उस पर क्लिक करने से आपको वह पेज मिल जाएगा जिससे आप उसे अपने ब्‍लॉग भी लगा सकने के लिए कोड जुटा लेंगे।

सिद्धार्थ जोशी
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