Friday, January 2, 2009

सूप और छ्लनी

"सूप दूसे छलनी के जेकरा बह्त्तर गो छेद "

यह भी एक बिहारी कहावत है जिसके पीछे कहानी कुछ ऐसी है कि एक बार सूप और छलनी में लडाई हो गई , तो छलनी ने सूप से कहा कि तुम्हारे तो सारे बदन पर छोटे- छोटे छेद है.तो सूप ने कहा की तुम्हारे बदन में तो मुझसे भी बड़े छेद है।
इसका तात्पर्य यह है की कोई ग़लत इन्सान जब किसी दूसरे ग़लत इन्सान की बुराई करता है तो मामला इस कहावत का बनता है। जैसे एक अपराधिक छवि वाला नेता जब दूसरे नेता का अपराधिक रिकॉर्ड गिनवा रहा होता है तो स्थिति इस कहावत की बनती है।

2 विचार आए:

Abhishek said...

आने वाले चुनावों में उदाहरणों की कमी नहीं रह जायेगी. शुभकामनाएं.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सही कहावत है यह ...अपनी गलतियां कौन देख पाता है

 

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