Tuesday, January 13, 2009

bihari और बंगाली कहावत

bihari कहावत - " कम्बल ओढ़ कर घी पिए है "
बंगला कहावत -" डूबे- डूबे जोल khawa "
दोनों कहावतो का मर्म एक ही है कि छुप छुप कर अपना काम करना ya maje lena bina kuch logo ko pata lage.
jol kawa - pani pina

4 विचार आए:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बढ़िया है यह :)

राज भाटिय़ा said...

आज के जमाने को कोन घी को पचा पायेगा?.
बहुत सुंदर कहावत, हम ने पहली बार सुणी.
धन्यवाद

Abhishek said...

Aapne to aaj bataya, hamare netagan to arse se ispar amal karte a rahe hain. Acchi prastuti, Badhai.

सिद्धार्थ जोशी said...

डूबे डूबे पानी पीना का तो आराम से इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है। आपने तो इस बार बंगाली और बिहारी कहावतों को एक साथ दे दिया। सुंदर

आभार

 

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