Thursday, January 8, 2009

एक बंगला की कहावत

जेखाने चास होए , से खाने बास होए ना
जे खाने बास होए , से खाने चास होए ना।
अर्थात आदमी जहा रहता है वहा खेती यानि कारोबार नही करता , जहा खेती या कारोबार करता है वहा रहता नही है। मतलब जमीन एक ही चीज के लिए उपयोग में लाई जाती है। पुराने ज़माने में घर के बड़े बुजुर्ग घर और bahar
में परदा रखने की हिदायत दिया करते थे।
बंगाल में इस कहावत का इस्तेमाल इस बात पर भी किया जाता है किनौकरी करने कि जगह पर थोते प्रेम प्रसंग नही पाले जाते है , और जहा प्रेम करते है वहा से ग़लत फायदा कमाने कि कोशिश नही करनी चाहिए।

जे खाने - जहा ; बॉस - रहने की जगह ; चास -खेती करना .

5 विचार आए:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

पहली बार जाना इस कहावत के बारे में ..बहुत अच्छी लगी आख़िर की पंक्तियाँ

Amit said...

acchi kahaawat hai......

सिद्धार्थ जोशी said...

बहुत सुंदर कहावत माधवी जी

इस तरह की कहावतें ही हमें जीने का सही सलीका सिखाती हैं। अमूल्‍य कहावत के लिए आभार

राज भाटिय़ा said...

बिलकुल सही कहा जहां प्यार हो वहा अपना मतलब नही निकालना चाहिये, लेकिन आज लोग प्यार करते ही अपना मतलब निकालने के लिये है,
धन्यवाद

Abhishek said...

काफी व्याहारिक कहावत है.

 

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