Thursday, February 26, 2009

एक कहावत

अति सर्वत्र वर्जिते ।
अति यानि जरूरत से ज्यादा ,हर कही वर्जित होता है यानि मना । क्योकी यह कहते है - सीता क्यो हरी गई , क्यो की वो अत्यधिक सुंदर थी, रावन क्यो मारा ,क्यो की उसमे बहुत अंहकार था.इस लिए अपने जीवन में हमें बैलेंस रखना चाहिए । किसी भी चीज के फीचे जयादा नही दौड़ना नही चाहिए।

4 विचार आए:

आलोक सिंह said...

प्रणाम

एकदम सत्य वचन

मोहिन्दर कुमार said...

संयम की अति से क्या होता है गुरू जी

बहुत से अविष्कार इसीलिये हो पाये कि इसके लिये कुछ लोग पागलों की तरह (अति) प्रयास करते रहे...

तर्क है... शब्द हैं शब्दों को किसी भी तरह मोड लीजिये और अपने माफ़िक प्रयोग कीजिये आज तक यही हुआ है... प्रमाणित कुछ नहीं है

संगीता पुरी said...

बिल्‍कुल सही कहावत ...

राज भाटिय़ा said...

सत्य वचन.
धन्यवाद

 

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