Wednesday, February 11, 2009

एक bihari कहावत

रूपवाली रोये भागवाली खाए
यानि कि जिस महिला के पास रूप हो पर उसके पास भाग्य नही हो तो उसका पति न मानेतो बेचारी का जीवन रोते बीतता है, पर कोई महिला जिसका भाग्य बहुत तेज हो पर वो उतनी सुंदर न हो पर उसका पति उसे माने तो उसका जीवन बहुत सुंदर बीतता है.उस ज़माने के हिसाब से ये कहावत बनी थी जब स्त्री का जीवन सिर्फ़ पति कि स्वीकारोक्ति पर निर्भर रहता था। इसमे भाग्य कि महत्ता को स्वीकार गया है.यह बात सर्वविदित है.

3 विचार आए:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

आज यह कहावत चाहे सच न हो पर कई बुजुर्ग लोगो से बोलते सुना है इया कहावत को

राज भाटिय़ा said...

बहुत अच्छी कहावत. धन्यवाद

सिद्धार्थ जोशी said...

यानि एक बात तय है कि बैठे बैठे खाने के लिए रूप ही काफी नहीं है भाग्‍य भी होना चाहिए। :)

 

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