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अगहन, पूस, माघ, फागुन.....

अगहन माह खाओ तेल, पूस में करो दूध से मेल।
माघ मास घी-खिचड़ी खाए, फागुन उठके सुबह नहाय।


बिहारी जनमानस में कहावतों के माध्यम से भी अलग-अलग मौसम के लिए खान-पान के सबंध में सुझाव दिए गए हैं।
ऐसी ही एक कहावत के अनुसार अगहन माह में तेल युक्त भोजन, पूस में दूध के पदार्थ, माघ में घी-खिचड़ी और फागुन में प्रातः काल स्नान स्वास्थ्य के लिए उत्तम है।

Comments

बहुत अच्छी जानकारी है इस कहावत के द्वारा .
धन्वाद
Nirmla Kapila said…
badon ki kahavaten bahut sahi hoti hain magar aaj kal ke bachon ko shayad ye bhi naa pata ho ki desi maheene bhi hote hain bahut badiya paryas hai badhai
बहुत सुंदर कहावत अभिषेक जी आभार

एक बात मेरी ओर से। अगर आप इन महीनों का अंग्रेजी संस्‍करण अनुवाद दे देते तो नए बच्‍चे भी समझ जाते। जैसा कि निर्मलाजी ने बताया। एक ओर कहावत याद करने में आसानी होती वहीं नए बच्‍चे भी जुड़ते। :)
कहावतों के बहाने आपने अच्छी जानकारी दे दी.
बहुत ही सुंदर
धन्यवाद
Abhishek said…
प्रस्तुत मुहावरे को पसंद करने और हौसला बढ़ाने का शुक्रिया.

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चइते चना, बइसाखे बेल, जेठे सयन असाढ़े खेल  सावन हर्रे, भादो तीत, कुवार मास गुड़ खाओ नीत  कातिक मुरई, अगहन तेल, पूस कर दूध से मेल  माघ मास घिव खिंच्चड़ खा, फागुन में उठि प्रात नहा ये बारे के सेवन करे, रोग दोस सब तन से डरे।
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