Saturday, February 21, 2009

एक bihari कहावत

दिन भर औरे बौरे , रात को दिया लेकर दौड़े
यानि जब काम करने का समय होता है तब यहाँ -वहा जा कर समय नष्ट कर देते है । पर जैसे ही सर पर काम सवार हो जाता है ,तब जमीं आसमान एक कर दिया जाता है उस काम को निपटने के लिए।चुनाव के समय नेता अपने चुनाव kshtra ke liye यही काम करते है।

6 विचार आए:

गिरीन्द्र नाथ झा said...

सरजी, आपके ब्लॉग का नियमित पाठक हूं। कहावतों में रम जाता हूं । शुक्रिया कहावतों से रूबरू कराने के लिए।
गिरीन्द्र

आशीष कुमार 'अंशु' said...

दिन भर औरे बौरे , रात को दिया लेकर दौड़े

हा हा हा हा

mehek said...

bahut achhi kahawat,sach ye blog ek khazane se kum nahi.sundar.

अविनाश वाचस्पति said...

नेता
अपने चुनाव क्षेत्र
के लिए
काम करते हैं!
हकीकत से रूबरू
कराने के लिए
शुक्रिया।

सिद्धार्थ जोशी said...

मैंने कही पढ़ा था कि एक आम आदमी जानबूझकर काम को टालता है और अंत में डेडलाइन के करीब तेजी से काम को निपटाता है। जिन कामों को पूरा करने में सफल हो जाता है उन्‍हें पूरा करने के साथ ही लड़ाई जीतने जैसी अनुभूति होती है। मानो अभी अभी दो काउ ब्‍वॉय लड़ें हों और जीतने वाला अपनी पिस्‍तौल की नली से निकलते धुएं को फूंक मार रहा है। इसलिए इसे गलती के रूप में नहीं बल्कि मानवीय व्‍यवहार के रूप में भी देखा जा सकता है।

यह मेरी सोच है कहावत का अर्थ नहीं :) ___

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बढ़िया सही कहावत बनाई है यह

 

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