Sunday, April 5, 2009

हँसुआ के बिआह में खुरपी के गीत

हँसुआ के बिआह में खुरपी के गीत


इसका मतलब हुआ माहौल के विपरीत अर्थात बिल्कुल अप्रासंगिक बात करना।
यह कहावत बिहार में बहुत प्रचलित है। अगर किसी विषय पर बात चल रही हो और अचानक कोई एक नयी बात शुरू कर दे तो यह कहावत कही जाती है।

सतीश चंद्र सत्यार्थी

4 विचार आए:

अल्पना वर्मा said...

badiya hai..aisa to aksar kartey hain log..

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

सुंदर कहावत, और ज्ञानवर्द्धक भी। आभार सतीश जी

परमजीत बाली said...

बढिया जानकारी।

imnindian said...

badhiya hai ....aisi posting aur dale....

 

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