Thursday, May 8, 2008

ब्‍याह बिगाडे दो जणा, कै मूंझी कै मेह

कहावत है
ब्‍याह बिगाडे दो जणा, कै मूंझी कै मेह
ब्‍याह शादी
जणा लोग
कै या फिर
मूंझी कंजूस
मेह बारिश
यानी दो लोग शादियां बिगाडते हैं, या तो कंजूस और बारिश।

5 विचार आए:

Udan Tashtari said...

यह तो पहली बार सुनी.आभार.

हर्षवर्धन said...

ये तो गजब कहावत है।

योगेन्द्र मौदगिल said...

अद्भुत प्रयास है. नई पीढ़ी के लिये तो शिक्षाप्रद भी.

mamta said...

एकदम नई कहावत।
राजीव जी बारिश के लिए तो सुना था पर कंजूस नही।

आनंद said...

बहुत अच्‍छा काम है। जारी रखें।

 

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