Sunday, May 4, 2008

शुरु होता है कहावतों का सफर

यह ब्लॉग समर्पित है लोक अंचल की ऐसी कहावतों को जो क्षेत्र विशेष में तो बहुत बोली जाती है लेकिन किन्हीं कारणों से कभी प्रिंट नहीं होती। कहावतों की मिठास, चुभन और मिट्टी की खुशबू की बानगी देखने को मिलेगी इस उम्मीद के साथ हम यह ब्लॉग शुरु कर रहे हैं।

5 विचार आए:

राजीव जैन Rajeev Jain said...

आपको इस प्रयास के लिए शुभकामनाएं

उड़ उड़ आंखों में पड़ी राजस्थानी रेत
सुपरकिंग के हो रहे सभी धुरंधर खेत
सभी धुरंधर खेत वीरगति पाए धोनी
शेन लिए शमशीर बनाए सूरत रोनी
दिव्यदृष्टि मद्रास केसरी देखें मुड़-मुड़
राजस्थानी रेत पड़ी आंखों में उड़ उड़

कमल शर्मा said...

आइडिया चोखा है। लाओं जी कहावतों का ब्‍लॉग।

प्रभात said...

बढिया आइडिया लगा ! जिस देश मे हर १० कि.मी पर भाषा बदल जाती हो वहाँ बोली, रिवाज आदि सब एक कौतुहल का विषय से लगते हैं ।

Udan Tashtari said...

स्वागत है, शुरु हो जाईये.

अनुनाद सिंह said...

बहुत अच्छा विचार है। शुरू कीजिये।

कहावतों में हमारी पीढ़ियों के गहन अनुभव छिपे हुए हैं। उन्हें जन-जन का हिस्सा बनने की बहुत जरूरत है। हिन्दी से बेहतर इसे कौन कर सकता है?


स्वागतम!!

 

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