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बाबल हो छीछर आळो...

'बाबल हो छीछर आळो
खसम मिल ग्‍यो घूघर आळो'


बाबल - पिता
छीछर - फटे हुए कपडे
खसम - पति
घूघर - सोने की पगरखी
आळो - वाला

सास बहू की लडाइयां जग प्रसिद्ध हैं। सास काठ की भी हो तो बहू तो सुहाती नहीं है और बहू कुछ भी जतन कर ले सास खुश नहीं होती। ऐसे में पति का प्‍यार पाने वाली ऐसी बहू जिसका पीहर ज्‍यादा पैसे वाला नहीं होता, जब कोई ऊंची बात कह जाती है तो सास ताना देती है कि पिता के घर में तो कुछ देखा नहीं और पति (उसका बेटा) बहू को अच्‍छा मिला गया।

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