Tuesday, May 6, 2008

फूहड घर में लगी किंवाडी...

"फूहड घर में लगी किंवाडी

सगळा कुत्ता चल्‍या रेवाडी

बूढे कुत्ते लियो सुण

लगाई तो है पर ढकसी कूण"



किंवाडी - जाली का दरवाजा जो मुख्‍यद्वार से आगे होता है
सगळा - सभी
सुण - सुनना
ढकसी - बंद करना
कूण - कौन

यह कहावत है फूहड लोगों के लिए कि वे कोई भी व्‍यवस्‍था क्‍यों न कर लें जब तक सिस्‍टम के लोग सक्रिय नहीं होंगे तब तक व्‍यवस्‍था सुचारू नहीं हो सकती।

कहानी यह है कि एक बडा घर था, उसमें काफी लोग रहते थे लेकिन कोई भी अपनी जिम्‍मेदारी नहीं समझता था, सब अपने में मस्‍त रहते। इसका फायदा गली के कुत्ते उठाते और जब-तब घर में घुस जाते थे। घर के मालिक से इस समस्‍या के समाधान के लिए एक रास्‍ता निकाला कि घर के मुख्‍य द्वार के आगे लकडी का जालीदार छोटा गेट लगा दिया। कुत्तों ने सोचा कि अब हमारी दाल यहां नहीं गलेगी तो वे वहां से रवाना हो गए। कुत्तों में एक सयाना बुढ्ढा कुत्ता था उसने जब यह बात सुनी तो हंसा। बोला किंवाडी लगाने से कुछ नहीं होता इसे ढकना भी पडता है। जैसे मुख्‍य द्वार खुला रहता है वैसे ही किंवाडी भी खुली रहेगी। बूढे कुत्ते की बात सुनकर बाकी कुत्तों की जान में जान आई। इसके बाद सभी कुत्ते सुख से वहीं रहने लगे और घ्‍ार के अन्‍दर और बाहर आते-जाते रहे।

2 विचार आए:

Udan Tashtari said...

मजेदार कहावात! अर्थ अच्छे से समझाया है. बधाई.

राजीव जैन Rajeev Jain said...

धरोहर को बचाने में आपके इस सहयोग को इतिहास बरसों बरस याद रखेगा।
खूब अच्‍छी तरह समझाया आपने

 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

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