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आप मरियो जुग परलय

आप मरियो जुग परलय

आप: खुद
मरियो: मरने पर
जुग: सृष्टि
परलय: प्रलय

मेरी मौत आ जाए तो भले ही प्रलय हो जाए। जो लोग यह मानते हैं कि मेरे जिन्‍दा रहने तक ही सृष्टि है उन लोगों का यह भी मामना होता है कि उनके मरने के बाद तो प्रलय हो जाएगी। भले ही प्रलय न हो लेकिन उनके लिए फिर दुनिया का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। आमतौर पर इस कहावत का इस्‍तेमाल वर्तमान की उन समस्‍याओं के लिए किया जाता है जिनका सॉल्‍यूशन दिखाई नहीं दे रहा होता है। वे कहते हैं कि हम तो मर जाएंगे बाद में भले ही इन समस्‍याओं के साथ प्रलय आ जाए।

Comments

Lovely kumari said…
आपका ब्लॉग अच्छी कोसिस है.आप इसे कामुनिटी ब्लॉग क्यों नही बना देते हैं.सारे अंचलों की कहावतों का मेल एक जगह अच्छा रहेगा.वैसे यह सिर्फ़ एक सुझाव है अन्यथा न लें.
कृपया वर्ड वेरीफिकैसन हटा दें हिन्दी ब्लोगिंग मे स्पेम की कोई समस्या अभी नही है.

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चैत चना, वैशाख बेल - एक भोजपुरी कहावत

चइते चना, बइसाखे बेल, जेठे सयन असाढ़े खेल  सावन हर्रे, भादो तीत, कुवार मास गुड़ खाओ नीत  कातिक मुरई, अगहन तेल, पूस कर दूध से मेल  माघ मास घिव खिंच्चड़ खा, फागुन में उठि प्रात नहा ये बारे के सेवन करे, रोग दोस सब तन से डरे।
यह संभवतया भोजपुरी कहावत है। इसका अर्थ अभी पूरा मालूम नहीं है। फिर भी आंचलिक स्‍वर होने के कारण गिरिजेश भोजपुरिया की फेसबुक वॉल से उठाकर यहां लाया हूं।

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माधवी

एक कहावत

न नौ मन तेल होगा , न राधा नाचेगी ।
ये कहावत की बात पुरी तरह से याद नही आ रही है, पर हल्का- हल्का धुंधला सा याद है कि ऐसी कोई शर्त राधा के नाचने के लिए रख्खी गई थी जिसे राधा पुरी नही कर सकती थी नौ मन तेल जोगड़ने के संदर्भ में । राधा की माली हालत शायद ठीक नही थी, ऐसा कुछ था। मूल बात यह थी कि राधा के सामने ऐसी शर्त रख्खइ गई थी जो उसके सामर्थ्य से बाहर की बात थी जिसे वो पूरा नही करपाती। न वो शर्त पूरा कर पाती ,न वो नाच पाती।
अजगर करे ना चाकरी पंछी करे ना काम ,
दास मलूका कह गए सब के दाता राम ..
तात्पर्य -  अजगर किसी की नौकरी नहीं करता और पक्षी भी कोई काम नहीं करते भगवान सबका पालन हार है इसलिए कोई काम मात करो भगवान स्वयं ही देगा आलसी लोगों के लिए मलूक दास जी की ये पंक्तियाँ रामबाण है !

खंगार की जाति

"भोंर मछों और खंगार की जात सोतन  बधियो आधी रात " भावार्थ ;- शहद की बड़ी मधुमक्खी और खंगार जाति के  व्यक्ति बड़े ही खतरनाक होते हैं इसलिए उनका बध आधी रात के समय जब वे सोये हुए हो तब करना चाहिए ! इस कहावत में खंगार वीरों से शत्रुओं में ब्याप्त भय का बोध होता है ........