Skip to main content

एक bihari कहावत

खेत खाए गधा , मार खाए जूल्हा।
मतलब की गलती कोई और करे और भरे कोई और।

Comments

प्रत्‍येक कहावत कोई लोक कथा समाहित किए होती है । यदि तत्‍‍सम्‍‍बन्धित लोक कथा भी पढने को मिल जाए तो सोने में सुहागा ।
सही कहा विष्णु जी ने ..कहानी के बिना कहावत का मजा नही आता
कहावत तो हमने भी सुनी है , पर कहानी हम नहीं जानते। इसलिए इसे कहते हैं....
खेत खाए गधा , मार खाए जो रहा।
माधवी जी मैं विष्‍णुजी, रंजना जी और संगीता जी की बात से इत्‍तफाक रखता हूं।
करे कोई भरे कोई की याद दिलाने वाली इस कहावत के पीछे की कहानी अन्‍य अंचलों के लोगों को पता नहीं होगी तो आप पोस्‍ट को सुधारकर इसमें शामिल कर दें तो कृपा होगी।

आपके प्रयास के लिए आभार
imnindian said…
baap re, maine nahi socha tha ki itna response milega. par aab lagta hai kahani ka pata lagana hi pade ga. asal me hum shahar me padhe likhe gawar hai jinki aapni mitti ki pakad dhili hoti ja rahi hai . use hi bachane ki kosish hai meri. sath me aap logo ka sahyog chahiye.

Popular posts from this blog

चैत चना, वैशाख बेल - एक भोजपुरी कहावत

चइते चना, बइसाखे बेल, जेठे सयन असाढ़े खेल  सावन हर्रे, भादो तीत, कुवार मास गुड़ खाओ नीत  कातिक मुरई, अगहन तेल, पूस कर दूध से मेल  माघ मास घिव खिंच्चड़ खा, फागुन में उठि प्रात नहा ये बारे के सेवन करे, रोग दोस सब तन से डरे।
यह संभवतया भोजपुरी कहावत है। इसका अर्थ अभी पूरा मालूम नहीं है। फिर भी आंचलिक स्‍वर होने के कारण गिरिजेश भोजपुरिया की फेसबुक वॉल से उठाकर यहां लाया हूं।

नंगा और नहाना

एक कहावत : नंगा नहायेगा क्या और निचोडेगा क्या ?
यानि जो व्यक्ति नंगा हो वो अगर नहाने बैठेगा तो क्या कपड़ा उतारेगा और क्या कपड़ा धोएगा और क्या कपड़ा निचोडेगा। मतलब " मरे हुए आदमी को मार कर कुछ नही मिलता" ।
होली की शुभ कामनाये सभी को।
माधवी

एक कहावत

न नौ मन तेल होगा , न राधा नाचेगी ।
ये कहावत की बात पुरी तरह से याद नही आ रही है, पर हल्का- हल्का धुंधला सा याद है कि ऐसी कोई शर्त राधा के नाचने के लिए रख्खी गई थी जिसे राधा पुरी नही कर सकती थी नौ मन तेल जोगड़ने के संदर्भ में । राधा की माली हालत शायद ठीक नही थी, ऐसा कुछ था। मूल बात यह थी कि राधा के सामने ऐसी शर्त रख्खइ गई थी जो उसके सामर्थ्य से बाहर की बात थी जिसे वो पूरा नही करपाती। न वो शर्त पूरा कर पाती ,न वो नाच पाती।
अजगर करे ना चाकरी पंछी करे ना काम ,
दास मलूका कह गए सब के दाता राम ..
तात्पर्य -  अजगर किसी की नौकरी नहीं करता और पक्षी भी कोई काम नहीं करते भगवान सबका पालन हार है इसलिए कोई काम मात करो भगवान स्वयं ही देगा आलसी लोगों के लिए मलूक दास जी की ये पंक्तियाँ रामबाण है !

खंगार की जाति

"भोंर मछों और खंगार की जात सोतन  बधियो आधी रात " भावार्थ ;- शहद की बड़ी मधुमक्खी और खंगार जाति के  व्यक्ति बड़े ही खतरनाक होते हैं इसलिए उनका बध आधी रात के समय जब वे सोये हुए हो तब करना चाहिए ! इस कहावत में खंगार वीरों से शत्रुओं में ब्याप्त भय का बोध होता है ........