Friday, December 19, 2008

एक bihari कहावत

खेत खाए गधा , मार खाए जूल्हा।
मतलब की गलती कोई और करे और भरे कोई और।

5 विचार आए:

विष्णु बैरागी said...

प्रत्‍येक कहावत कोई लोक कथा समाहित किए होती है । यदि तत्‍‍सम्‍‍बन्धित लोक कथा भी पढने को मिल जाए तो सोने में सुहागा ।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सही कहा विष्णु जी ने ..कहानी के बिना कहावत का मजा नही आता

संगीता पुरी said...

कहावत तो हमने भी सुनी है , पर कहानी हम नहीं जानते। इसलिए इसे कहते हैं....
खेत खाए गधा , मार खाए जो रहा।

सिद्धार्थ जोशी said...

माधवी जी मैं विष्‍णुजी, रंजना जी और संगीता जी की बात से इत्‍तफाक रखता हूं।
करे कोई भरे कोई की याद दिलाने वाली इस कहावत के पीछे की कहानी अन्‍य अंचलों के लोगों को पता नहीं होगी तो आप पोस्‍ट को सुधारकर इसमें शामिल कर दें तो कृपा होगी।

आपके प्रयास के लिए आभार

imnindian said...

baap re, maine nahi socha tha ki itna response milega. par aab lagta hai kahani ka pata lagana hi pade ga. asal me hum shahar me padhe likhe gawar hai jinki aapni mitti ki pakad dhili hoti ja rahi hai . use hi bachane ki kosish hai meri. sath me aap logo ka sahyog chahiye.

 

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