Saturday, December 20, 2008

अपनी दही खट्टी नहीं

इस बार भोजपुरी अंचल से एक और व्यावहारिक कहावत:-
"अपना दही के अहीर खट्टा ना कहे।"
अहीर - दूध/दही वाला,
यानी, दही चाहे लाख बुरी हो, यह जानते हुए भी दही वाला उसे खट्टा नहीं बताएगा, बल्कि वो उसकी तारीफ ही करेगा। क्या यह कहावत अपने एक पड़ोसी देश पर भी खरी नहीं उतरती!

4 विचार आए:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर सुंदर कहावतें है, धन्यवाद

सिद्धार्थ जोशी said...

सुंदर कहावत

ऐसी ही एक कहावत हमारे बीकानेर में भी कही जाती है। ये कुछ इस तरह है

आपरो पादो घणो स्‍वादो

यानि अपना पाद ज्‍यादा स्‍वाद लगता है। इसे आमतौर पर इस संदर्भ में इस्‍तेमाल किया जाता है कि कोई व्‍यक्ति काम करे या क्रिएशन करे और उसे ही सबसे अच्‍छा बताए।

यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन बहुत इस्‍तेमाल किया जाता है। यहां मैंने तो पाद का अर्थ बैड स्‍मैल की तुलना में सृजन के संदर्भ में अधिक इस्‍तेमाल देखा है।

''ANYONAASTI '' said...

''कानी बिना'' वाला मुहावरा कुछ ग़लत लिखा है सुधारें
'' यह इस प्रकार से है .....
" कानी बिना रहओ ना जाए ,कानी देखे मूड़ [ चाहें तो नैन कहें ] पिराये |

Sachin Malhotra said...

Wish you a Merry Christmas and may this festival bring abundant joy and happiness in all of yours life!

Merry Chirstmas.....


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