Saturday, August 22, 2009

दो कहावतें मेल से पहुंची

कहावतें ब्‍लॉग के पाठक न सिर्फ पढ़कर फुर्सत पा लेते हैं बल्कि रोचक टिप्‍पणियां भी करते हैं, कभी सलाहें और मशविरे भी होते हैं। कुछेक कहावतें भी आती हैं। पिछले दो दिनों में दो टिप्‍पणियों में दो कहावतें अतिरिक्‍त आई हैं। प्रस्‍तुत हैं

कमाऊ आवे डरता
निखट्टू आवे लड़ता

यह भेजी है Vandanaजी ने


जबरा मारै रोवै न दे.

यह भेजी है मीनू खरेजी ने

दोनों पाठकों का हृदय से आभार और एक सलाह भी कि क्‍यों न वे खुद इस ब्‍लॉग में कभी कभार कहावतें पोस्‍ट किया करें। इन दोनों कहावतों को मैं समझ सकता हूं लेकिन खुद लेखक जो भाव लेकर लिखता है उसकी बराबरी नहीं हो सकती। इसलिए बिना विश्‍लेषण प्रस्‍तुत है जैसी मिली वैसी की वैसी कहावतें।

9 विचार आए:

Udan Tashtari said...

दोनों कहावतें बढ़िया!!

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

कहावतों के बहाने अपनी लोकसंस्कृ्ति से परिचिय कराने का आपका ये प्रयास निसंदेह सराहणीय है।।
देखते हैं,हम भी कोई कहावत भेजते हैं!!

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

पंडितजी आपको आमंत्रण भेज दिया है। और अब शुरू होता है आपकी कहावत का इंतजार...

मीनू खरे said...

अरे वाह ! यह पोस्ट देख कर मज़ा आ गया. अब से विवेचना सहित पोस्ट करूँगी.

Sudhir (सुधीर) said...

अति उत्तम. साधू !

Mithilesh dubey said...

लाजवाब कहावते।

अविनाश वाचस्पति said...

साधू साधू नहीं
कहावतें दोनों
स्‍वादू स्‍वादू

महेन्द्र मिश्र समयचक्र said...

श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभ कामनाएं

कैटरीना said...

Aise hi khajaa badhaate rahen.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को प्रगति पथ पर ले जाएं।

 

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