Saturday, July 17, 2010

olam maasi dhamm

ओलम मसि अधम्म  बाप पढ़े ना हम्म !!

भावार्थ :- यूँ तो इस बुन्देलखंडी कहावत को संस्कृत के वाकया ॐ नमः सिद्धं , का अपभ्रंस माना जाता है . किन्तु यह कहावत बुंदेलखंड  के खंगार राजवंश जुडी है . खंगार काल  में बुंदेलखंड जुझौती प्रदेश के नाम से जाना जाता था . खंगार  राजा जुझारू संस्कृति के  पालक पोषक थे . जिनके स्वाभिमान के किस्से बुंदेलखंड में गाये जाते है . तो इस कहावत का अर्थ है कि अरबी फारसी अधम ( अपवित्र , नीच  ) लोगो कि भाषा है इसको ना हमारे पूर्वजो ने पढ़ा है  ना हम पढेंगे क्योंकि ऐसा  करने से हम भी अधम ( अपवित्र ,  नीच  ) हो जायेंगे !!!!!

2 विचार आए:

राज भाटिय़ा said...

अजी अग्रेजी भी तो....अधम ( अपवित्र ) लोगो कि भाषा है फ़िर यह तो हमे मार मार कर भी गये है गुलाम भी ब्नाया फ़िर भी इन की भाषा को क्यो सर माथे पर बिठाये है???

ashok suryavedi said...

भाटिया जी !
यह तो वक्त वक्त की बात है !!

 

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