Thursday, July 29, 2010

चिलम तमाखू हुक्का ,
साहब चोर उचक्का !!

यह कहावत बुंदेलखंड के खंगार काल से जुडी है यहाँ उपयुक्त साहब शब्द ने यवन शब्द का स्थान ग्रहण किया है . बुन्देली जन मानस के दिमाग में उस समय तक यह धरना थी की यवन चोर उचक्के होते हैं इनसे किसी तरह का व्यवहार नहीं रखना है . बाद में यही कहावत अफसर वर्ग के लिए प्रयोग में लाई जाने लगी ..

1 विचार आए:

राज भाटिय़ा said...

चिलम तमाखू हुक्का ,
साहब चोर उचक्का !!
सत्य वचन

 

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