Monday, July 27, 2009

जुलाहे से लठ्ठमलट्ठा

सूत न कपास,

जुलाहे से लठ्ठमलट्ठा

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इसका भावार्थ है किसी ऐसी चीज के लिए लड़ने लगना जिसका कोई अस्तित्व ही न हो।

हमारे बाबा-दादी इसको लेकर एक छोटी सी कहानी सुनाते थे कि एक बार दो पड़ोसियों में आपस में बात हो रही थी। एक खेत खरीदने जा रहा था और दूसरा भैंस खरीदने।

पहले पड़ोसी ने कहा कि तुम अपनी भैंस बाँध कर रखना कहीं हमारे खेत में घुस कर फसल न खा जाये। दूसरे पड़ोसी को यह बुरा लगा उसने कहा कि तुम अपने खेत में बाड़ लगाना क्योंकि भैंस तो मूक जानवर है। उसे बार-बार कैसे रोका जा सकेगा?

बस इसी बात पर दोनों में कहासुनी बहुत बढ़ गई। देखते-देखते दोनों में लाठी-डंडों से लड़ाई भी शुरू हो गई।

सम्भवतः इसी को देखकर यह कहावत बनी होगी।

5 विचार आए:

Nirmla Kapila said...

शायद इसी से मिलती जुलती ये भी है -बादल देख कर घडे फोडना ऐर पँजाबी मे ये है --कनक खेत कुडी{लडकी} पेट आ जवाईया{दामाद} मन्डे{एक तरह की चपाती} खा अपकी कहावत मेरे लिये नई है आभार्

Udan Tashtari said...

इस कहावत पर सही जानकारी दी.

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

सही कहावत पर बिल्कुल सही जानकारी!!!

Abhishek Mishra said...

Iski pristhbhumi aaj hi jani.

हितेंद्र कुमार गुप्ता said...

Bahut barhia

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Manpasand Gaane

 

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