Thursday, July 9, 2009

एक बंगला कहावत

प्रीत कोरले भेबे कोरो, बेसी चुन लागले , मुख टा केते जबे , कोम होले , स्वाद आसबे न ।

यानि, प्रेम करना हो तो सोच समझ कर करे, ये पान में लगे चुने की तरह होता है। जयादा लग गया तो जीभ जल जाती है। कम लगे तो स्वाद नही आता है।

भेबे - सोच कर , कोरो - करना , होले - होने पर , बेसी - जयादा

5 विचार आए:

रंजीत said...

maja aa gaya. bharat kee boudhikta in kahabaton me hee chipee hai.

Udan Tashtari said...

आभार!

Sudhir (सुधीर) said...

प्रेम के उचित परिभाषा....

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

ये कहावतें नहीं अपने पूर्वजों के अनुभवों का वो खजाना है, जो जैसा कल था आज भी वैसा ही है।.....

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

वाह सुदर कहावत।

 

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