Thursday, August 14, 2008

सलाम प्रणाम में क्या फर्क करिए


माँ....तुझे प्रणाम...माँ तुझे सलाम
न सिर्फ प्रणाम न सिर्फ सलाम
सच

६१ बरस की आज़ादी और हम
कितने संवेदन हीन से हैं
मै तुम् ये वो
मिल कर "हम" न हो सके तो
सच हम मादरे-वतन के वफादार बच्चे नहीं
फिर भी कोशिश जारी रहे
वन्दे मातरम

6 विचार आए:

mahendra mishra said...

bhaut sundar badhai .

सतीश पंचम said...

अच्छी रचना

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब तीन लाईनो मे आप ने पुरे देश की कमजोरी बता दी, मे, तु वो तो सब हे लेकिन . हम ना हो सके. धन्यवाद

Udan Tashtari said...

स्वतंत्रता दिवस की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

GIRISH BILLORE MUKUL said...

स्वतंत्रता दिवस की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

सीधा-सादा विजय said...

साबुन नहीं मिलेगा जिससे धुलते हों गम
किसको याद कौन याद रखता वंदे मातरम
आप सरीखे दो-चार जो धुन के पक्के
बाकी सब छुड़ा रहे मर्यादाओं के छक्के ।।

 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

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