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सलाम प्रणाम में क्या फर्क करिए


माँ....तुझे प्रणाम...माँ तुझे सलाम
न सिर्फ प्रणाम न सिर्फ सलाम
सच

६१ बरस की आज़ादी और हम
कितने संवेदन हीन से हैं
मै तुम् ये वो
मिल कर "हम" न हो सके तो
सच हम मादरे-वतन के वफादार बच्चे नहीं
फिर भी कोशिश जारी रहे
वन्दे मातरम

Comments

mahendra mishra said…
bhaut sundar badhai .
अच्छी रचना
बहुत खुब तीन लाईनो मे आप ने पुरे देश की कमजोरी बता दी, मे, तु वो तो सब हे लेकिन . हम ना हो सके. धन्यवाद
Udan Tashtari said…
स्वतंत्रता दिवस की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.
स्वतंत्रता दिवस की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.
साबुन नहीं मिलेगा जिससे धुलते हों गम
किसको याद कौन याद रखता वंदे मातरम
आप सरीखे दो-चार जो धुन के पक्के
बाकी सब छुड़ा रहे मर्यादाओं के छक्के ।।

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चैत चना, वैशाख बेल - एक भोजपुरी कहावत

चइते चना, बइसाखे बेल, जेठे सयन असाढ़े खेल  सावन हर्रे, भादो तीत, कुवार मास गुड़ खाओ नीत  कातिक मुरई, अगहन तेल, पूस कर दूध से मेल  माघ मास घिव खिंच्चड़ खा, फागुन में उठि प्रात नहा ये बारे के सेवन करे, रोग दोस सब तन से डरे।
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