Tuesday, November 18, 2008

जाका पड्या स्‍वभाव

जाका पड़्या स्‍वभाव जासी जीव सूं
नीम न मीठो होयसी
सींचो गुड़ घी सूं


जासी : जाएगा
जीव- शरीर
जाका: जिसका
होयसी : होगा

जिसका जैसा स्‍वभाव पड़ा हुआ है वह अंत तक वैसा ही रहेगा। भले ही नीम को गुड़ और घी से ही क्‍यों न सींच दिया जाए उसमें मीठे फल नहीं निकल सकते। हिन्‍दी में इसके लिए कहा जाता है कि मिट्टी का रंग कभी बदलता नहीं है। इसी तरह और भी कई कहावतें लोगों के न बदलने वाले स्‍वभाव को लेकर कही गई है। यह रंग राजस्‍थान का है। अन्‍य अंचलों में भी इसके लिए कहावतें होंगी।

3 विचार आए:

वर्षा said...

पढ़कर अच्छा लगा

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सही कहावत है यह ..जैसे काले रंग पर चढे न कोई रंग दूजा ..

विष्‍णु बैरागी said...

स्‍तुत्‍य प्रयास है ।
मैं भी आपके रास्‍ते पर, आपके पीछे-पीछे चलने की तैयारी कर रहा हूं । पर्या प्‍त सामग्री एकत्रित होने पर प्रारम्‍भ करूंगा ।

 

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