Thursday, September 11, 2008

अंड को मूसरो

अक्सर देखा जाता है कि किसी काम के लिए कुछ विशेष या निश्चित लोगों की जरूरत होती है और कुछ बिना कारण बीच में हस्तक्षेप किया करते हैं ऐसे लोगों को किसी तरह का कोई लाभ भी नहीं मिलता है और सामाजिक स्थिति भी ख़राब हो जाती है. ऐसे ही लोगों को ध्यान में रख कर ये कहावत बनी होगी-

राजा को दूसरो,
अंड को मूसरो और
बकरिया को तीसरो,
परेशान होते है।

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अंड = एक लकडी जो एकदम खोखली होती है।

मूसरो = मूसल, जिससे कुटाई की जाती है।

बकरिया = बकरी

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इसका अर्थ है कि यदि राजा के दो लड़के हैं तो दूसरे को लाभ नहीं होता है क्योंकि राज्य परम्परा के अनुसार बड़े को मिलता है यानी पहले को. इसी तरह अंड की लकडी इतनी खोखली होती है कि यदि उसका मूसल बना लिया जाए तो भी उससे किसी तरह की कुटाई नहीं की जा सकती है. कुछ इसी तरह का हाल बकरी के तीसरे बच्चे का होता है. चूँकि बकरी के दो थन होते हैं और यदि उसके एक साथ तीन बच्चे हो जाते हैं तो तीसरे को हमेशा थन से दूध पीने में दिक्कत आती रहती है.

2 विचार आए:

कामोद Kaamod said...

सही कहा आपने.

सिद्धार्थ जोशी said...

बहुत सुंदर।
इसका प्रयोग अतिउत्‍साही लोगों पर तो किया ही जा सकता है। जो अपना काम नहीं होने पर भी घुसे रहते हैं कुछ करने की फिराक में। सही कहूं तो यही इस्‍तेमाल समझ में आया इसका। और भी कोई प्रयोग बता सकें तो कृपा होगी।

 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

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