Monday, October 20, 2008

खसम को रोटी तुम पै देओ

बातें-चीतें हमसे लेओ,
खसम को रोटी तुम पै देओ।
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खसम = पति
पै = बनाना
बातें-चीतें = बातचीत, गपशप
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बुंदेलखंड में ये कहावत ऐसे लोगों के लिए प्रयुक्त होती है जो काम की अपेक्षा बातों में अपना अधिक समय लगाते हैं.

4 विचार आए:

हिन्दी - इन्टरनेट said...

आपको सपरिवार दीपावली व नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

Neelima said...

बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग की सैर कर !

ashok suryavedi said...

abhinandniya pryas. Jai Jai BUNDELKHAND.

Anonymous said...

दाउ बकौल एक बुंदेलखंडी शहर का चरित्र है, जिसे इसे दुनिया में जो भी हो रहा है उस पर अपनी राय देनी के आदत है… चाहे वो फिल्में हो, राजनीति हो या, तकनीकी हो या अंतराष्ट्रीय मुद्दा.. .. पर ये उनकी अपनी सोच और अपनी कल्पना शक्ति के हिसाब से होती है और यही बात इस चरित्र को दिलचस्प बनाती है…
मुद्दा. काले धन का हो या, दिल्ली की राजनीति का, whatsapp का हो या फेसबुक का, यहाँ तक की बकौल दाउ की चिंता और अभियक्ति, अमेरिका के चुनाव तक है..
आप Youtube लिंक पे इस चरित्र का आनंद ले सकते हैं… और आगे आने वाले संस्करण के लिए चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं…
https://www.youtube.com/watch?v=_alF1OLdaZM

 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

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