Sunday, October 5, 2008

रोई रो फूल

रूप रूड़ो गुण बाइड़ो
रूईड़े रो फूल


रूड़ो : सुन्दर
बाइड़ो: कड़वा या असुंदर
रूइड़ो : जंगल

जंगल में खिलने वाला फूल सुंदर तो होता है लेकिन उसमें खुशबू या अन्य कोई गुण नहीं होता।

इसके लिए उदाहरण ले सकते हैं कि बिना पढ़ा लिखा सुंदर आदमी, बिना एटीट्यूड की खूबसूरत महिला, यानि सहयोगी गुण के बिना किसी एक गुण का विकसित होना। ऐसे नितांत गुण का कोई उपयोग नहीं होता।

(यह कहावत मेरी नानी ने मुझे बताई है।)

9 विचार आए:

manvinder bhimber said...

bahut suder kaha aapne

Udan Tashtari said...

पहली बार सुनी यह कहावत!! आभार.

Kuldeep said...

"जिस देश में हर तीन किलोमीटर पर बोली बदल जाती है और हर छह किलोमीटर पर पानी का स्‍वाद "

shayad yah kahavat isprakar hai

"kosh kos pe dale paanI, teen kos pe wani."

agar meri jankari galat ho to krapaya sudhare

Kuldeep said...

"जिस देश में हर तीन किलोमीटर पर बोली बदल जाती है और हर छह किलोमीटर पर पानी का स्‍वाद "

shayad yah kahavat isprakar hai

"kos kos pe badale paanI, aur teen kos pe wani."

agar meri jankari galat ho to krapaya sudhare

सिद्धार्थ जोशी said...

कुलदीप जी आपकी जानकारी बिल्‍कुल सही है। यहां इंट्रो में मैंने एक संकेत भर डाला है। चूंकि यह कहावत पूरी मुझे आती नहीं है इसलिए मैंने इससे छेडछाड नहीं की। आपको जानकारी हो तो हमें भी बताइएगा। इस ओर ध्यान दिलाने के लिए आभार।

आप अनुमति दें तो आपको सदस्यता का निमंत्रण भेज देता हूं।

राजीव जैन Rajeev Jain said...

good

DHAROHAR said...

Ye kahavatein bhi hamari saajhi dharohar hain. Ise apne blog se jodne se khud ko rok nahi paya.

Kuldeep said...

meri jankari me ye kahawat itani hai. ek baar meri ma ne batyi thi. "kos kos pe badale paanI, aur teen kos pe wani."

aap mujhe sadasyata ka nimtran bhej sakate hai.

वर्षा said...

अरे वाह,वनफूल का ये मुहावरा मजेदार है।

 

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