Thursday, July 5, 2012

चैत चना, वैशाख बेल - एक भोजपुरी कहावत

चइते चना, बइसाखे बेल, जेठे सयन असाढ़े खेल 
सावन हर्रे, भादो तीत, कुवार मास गुड़ खाओ नीत 
कातिक मुरई, अगहन तेल, पूस कर दूध से मेल 
माघ मास घिव खिंच्चड़ खा, फागुन में उठि प्रात नहा
ये बारे के सेवन करे, रोग दोस सब तन से डरे।

यह संभवतया भोजपुरी कहावत है। इसका अर्थ अभी पूरा मालूम नहीं है। फिर भी आंचलिक स्‍वर होने के कारण गिरिजेश भोजपुरिया की फेसबुक वॉल से उठाकर यहां लाया हूं। 

6 विचार आए:

kshama said...

Kahawat ka arth samajh me aata to badhiya hota!

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

पोस्‍ट करने के बाद पता चला कि ये कहावत न होकर, घाघ और भड्डरी के दोहे हैं, जो मौसम के बारे में जानकारी देते हैं। बिहार में इन्‍हें कहावतों के रूप में भी काम में लिया जाता है।

रचना said...

aap ka yae blog achchha lagaa

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

@रचना
धन्‍यवाद रचनाजी, एक कम्‍युनिटी ब्‍लॉग के रूप में शुरू किया गया था, अब इसमें कम पोस्टिंग हो रही है। अब फिर से ध्‍यान देना शुरू करूंगा। अगर आप भी इसमें रुचि रखती हों तो आपको लेखक के रूप में जोड़ने पर खुशी होगी...

Piyush k Mishra said...

चैत्र महीने में चना खाना, बैसाख में बेल, जेठ में शयन(घर से ना निकलना)आसाढ़ में खेलना, सावन में हराड, भादों में तीता, आश्विन में रोज़ गुड़ खाना, कार्तिक में मूली, अगहन में तेल लगाना,पूस में दूध पीना, माघ में घी और खिचड़ी खाना और फागुन में सुबह सुबह उठ कर नहाना. जो ये सब करता है उसे कोई भी रोग नहीं होता.

Abhayanand Shukla said...

ye kavi ghagh ki kahawat hai. isme hindi maheene ke hisab se khanpan v achar vichar rakhane ki bat kahi gayee hai. isme kaha gaya hai ki chait me chana khana chahiye v vaishakh me bel ka. jyeshth me achchhi need lena chahiye, asadh me kheti bari ka kam karna chahiye. savan me harr ka sevan, bhadrapad me masaledar v tikha bhojan karna chahiye,kwar yani ashwin me gud ka sevan, kartik me mooli, agahan me tel ki malish v tel se bani chije khani chahiye. pus yani paus me doodh v usase bani chije, magh me desi ghee v khichadi ka sevan karna chahiye. isake alawa falgun me roj suvah uth kar suryoday ke pahle snan kar lena chahiye. aisa karne wale hamesha nirog rahte hai. abhayanand shukla. rashtriya sahara. lucknow

 

मेरे अंचल की कहावतें © 2010

Blogger Templates by Splashy Templates