Wednesday, January 18, 2012

खंगार की जाति

"भोंर मछों और खंगार की जात सोतन  बधियो आधी रात "
भावार्थ ;- शहद की बड़ी मधुमक्खी और खंगार जाति के  व्यक्ति बड़े ही खतरनाक होते हैं इसलिए उनका बध आधी रात के समय जब वे सोये हुए हो तब करना चाहिए ! इस कहावत में खंगार वीरों से शत्रुओं में ब्याप्त भय का बोध होता है ........

0 विचार आए:

Labels

बुन्देली कहावतें (26) कहावत (7) जबलपुर (4) भोजपुरी कहावत (3) satish chandra satyarthi (2) बिहार (2) बुन्देली (2) भोजपुरी (2) राजस्‍थानी (2) सतीश चंद्र सत्यार्थी (2) अंचल (1) अभिषेक (1) इच्‍छा (1) इयारी (1) कहावतें (1) किसान (1) खेती (1) गाँव (1) घी (1) चाँद (1) चांदनी (1) चिट्ठा चर्चा (1) झांकी (1) टिमरनी (1) तबेला (1) तेल (1) दमडी की बुलबुल (1) दोहा (1) नमस्कार (1) नर्मदांचल (1) नववर्ष (1) नाथ (1) पंजाबी कहावतें (1) बंदर (1) बस्ता (1) बादल (1) बुडबक (1) बैजू (1) बैल (1) ब्लागिंग (1) ब्लॉगर (1) भैंसा (1) भोथर (1) मूर्ख (1) मेवाडी कहावत (1) रतनसिंह शेखावत (1) लाडली-लक्ष्मी (1) लोक-कहावतें (1) लोकसंस्कृ्ति (1) विद्यार्थी (1) विश्व पर्यावरण दिवस (1) शुभकामनायें (1) संगति (1) सिर (1) सुविधा (1) स्वर्गीय भारती सराफ (1) स्वास्थय (1) हँसुआ के बिआह में खुरपी के गीत (1) हरदा (1)