जैसे उदई, तैसेई भान, न उनके चुटिया, न उनके कान। ---------------------- भावार्थ - इसका अर्थ इस रूप में लगाया जाता है जब किसी भी काम को करने के लिए एक जैसे स्वभाव के लोग मिल जायें और काम उनके कारण बिगड़ जाये। कहा जा सकता है कि बेवकूफों को काम सौंपने से ही इस कहावत का जन्म हुआ होगा।