बहु-ऋणी, बहु-धन्धीय, बहु-बेटियाँ को बाप। इन्हें कबहूँ न मारिये, जे मर जैहें अपने आप॥ ============================= पुराने समय से लोक-नीतिगत कहावत के रूप में प्रचलित है कि जो व्यक्ति बहुत अधिक क़र्ज़ में डूबा हो, जो बहुत सारे कामों को एक साथ करता हो और जो बेटों की चाह में बहुत अधिक बेटियों को जन्म दे चुका है, ऐसे व्यक्ति के सामने आफत-मुसीबतें आती ही रहती हैं. इस वजह से इन्हें परेशान नहीं करना चाहिए ये तो अपने कारनामों से ख़ुद ही परेशां रहते हैं.